मंदिर और गोशाला की जमीन को लेकर विवाद, कब्जे के आरोपों पर सफाई, डीएम को सौंपा गया था ज्ञापन, जमीन मालिक ने दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को बताया निराधार - fastindianews

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Tuesday, December 30, 2025

मंदिर और गोशाला की जमीन को लेकर विवाद, कब्जे के आरोपों पर सफाई, डीएम को सौंपा गया था ज्ञापन, जमीन मालिक ने दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को बताया निराधार

झांसी। नगर के बड़ागांव गेट बाहर सुंदरपुरी का बाग स्थित श्रीश्री 1008 महाकालेश्वर मंदिर एवं गोशाला से जुड़ी लगभग 33 एकड़ भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को श्रीश्री 1008 महाकालेश्वर मंदिर एवं गोशाला सेवा समिति ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उक्त भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगाया था। समिति का दावा है कि मंदिर, गोशाला और आसपास की भूमि पिछले करीब 500 वर्षों से धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए प्रयुक्त होती आ रही है तथा यह भूमि जिला परिषद की देखरेख में रही है। समिति द्वारा दिए गए ज्ञापन के बाद जिस व्यक्ति पर भूमि कब्जाने का आरोप लगाया गया, उन्होंने मीडिया के माध्यम से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अजय कुशवाहा उर्फ राजाराम, निवासी 430/ए बड़ागांव गेट बाहर सुंदरपुरी का बाग, तहसील व जिला झांसी ने स्वयं को आराजी संख्या 645 से 608 तक कुल 62 खसरा, रकबा लगभग 10 हेक्टेयर भूमि का स्वामी एवं काबिज बताया है। अजय कुशवाहा का कहना है कि उक्त भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है और उसी भूमि पर चार मंदिर स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि इन मंदिरों के लिए भूमि उनके पूर्वजों द्वारा पूर्व में दी गई थी, जिनकी देखरेख वर्तमान में वह स्वयं कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई गई है और न ही धार्मिक गतिविधियों में कोई बाधा उत्पन्न की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग स्वयं को मंदिर कमेटी का अध्यक्ष बताकर उनकी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से अवैधानिक गतिविधियों में लिप्त हैं। अजय कुशवाहा के अनुसार, हाल ही में कुछ लोगों ने उनके कमरे और हॉल में ताला लगाकर कार्यालय बनाते हुए कब्जा करने का प्रयास किया। उन्होंने वर्ष 2019 की एक घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित रूप से इन्हीं लोगों ने उनकी जमीन को गोशाला की भूमि दर्शाकर सहायक रजिस्ट्रार, सोसायटी कार्यालय में पंजीकरण के लिए आवेदन दिया था। उस समय राजस्व निरीक्षक द्वारा की गई जांच में भूमि का स्वामित्व उनके नाम दर्ज पाए जाने पर उक्त आवेदन निरस्त कर दिया गया था।अजय कुशवाहा का यह भी कहना है कि उनके खिलाफ समय-समय पर झूठे प्रार्थना पत्र दिए जाते हैं, जबकि कई बार राजस्व विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच कर चुकी है और हर बार उनके दस्तावेज सही पाए गए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मंदिर समिति और उनके पक्ष से जुड़े सभी भूमि संबंधी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक दोषी कौन है और बेवजह चल रहे विवाद का स्थायी समाधान हो सके। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि मंदिर व गोशाला की भूमि पर कब्जे का आरोप सही है या नहीं।

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