झाँसी | एक समाज के हाल ही में संपन्न हुए आंतरिक चुनाव को लेकर समाज के भीतर व्यापक असंतोष और विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। समाज में हज़ारों की संख्या में मतदाता होने के बावजूद अध्यक्ष पद का निर्णय मात्र कुछ सैकड़ों मतों के आधार पर किए जाने से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में समाज के सदस्यों को मतदान से वंचित रखा गया। आरोप है कि मतदाता सूची सीमित रखी गई और चुनिंदा लोगों के माध्यम से मतदान कराकर परिणाम घोषित कर दिए गए। इसी प्रक्रिया के तहत एक व्यक्ति को अध्यक्ष घोषित किया गया, जो वर्तमान में अपने समर्थकों के बीच स्वयं को समाज का अध्यक्ष बता रहे हैं।
हालाँकि, समाज के बड़े वर्ग ने न तो इस चुनाव प्रक्रिया को स्वीकार किया है और न ही घोषित परिणाम को मान्यता दी है। समाज के लोगों का कहना है कि जिस चुनाव में समाज की व्यापक भागीदारी न हो, वह समाज का वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। अध्यक्ष पद की वैधता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
समाज के वरिष्ठ सदस्यों, युवाओं और बुद्धिजीवियों में इस बात को लेकर नाराज़गी है कि उनकी आवाज़ और मताधिकार को नजरअंदाज किया गया। कई लोगों का कहना है कि नेतृत्व केवल पद से नहीं, बल्कि समाज के विश्वास और सहमति से तय होता है।
फिलहाल कथित अध्यक्ष अपने समर्थकों के साथ सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, लेकिन समाज के भीतर बढ़ता असंतोष आने वाले समय में बड़े विवाद का रूप ले सकता है। समाजजन अब पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया, नई मतदाता सूची और सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।






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